नेशनल डेस्क। गाजियाबाद में एक अदालत में वकीलों और पुलिस के बीच भिड़ंत हो गई, जिसमें कई लोग घायल हो गए। यह घटना एक धोखाधड़ी के मामले में अग्रिम जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान हुई। वकीलों ने जिला जज से बदसलूकी की और पुलिस पर पथराव किया, जिसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया।
मामला कविनगर थाने में दर्ज धोखाधड़ी के मामले से जुड़ा है, जिसमें नौ लोग नामजद हैं। वकीलों ने जिला जज से बदसलूकी की और पुलिस पर पथराव किया, जिसमें दरोगा राजेश गंभीर रूप से घायल हो गए। उनके सिर में गहरी चोट आई है।
इस दौरान कचहरी स्थित पुलिस चौकी में आग लग गई और सामान जल गया। पुलिस ने वकीलों के खिलाफ दो मुकदमे दर्ज किए हैं और मामले की जांच की जा रही है। गाजियाबाद के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त दिनेश कुमार ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज कब्जे में ले लिए गए हैं।
वकीलों का आरोप है कि जिला जज ने उनसे बदसलूकी की और पुलिस को बुलाया, जिसके बाद लाठीचार्ज हुआ। वकीलों ने न्यायिक कार्य बंद कर दिया है और आगे की रणनीति पर विचार किया जा रहा है।
गाजियाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक शर्मा ने कहा है कि इस मामले में बैठक कर आगे की रणनीति बनाई जाएगी। लाठीचार्ज में 25-30 वकील घायल हुए हैं, जिनमें पांच महिला वकील हैं।
पुलिस ने वकीलों के खिलाफ बलवे, सरकारी काम में बाधा, और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की धाराएं लगाई हैं। मामले की जांच जारी है और आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना के बाद से कचहरी परिसर में तनाव है और पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है। वकीलों ने अपने काम काज को ठप कर दिया है और अदालतों में सुनवाई नहीं हो रही है।
सरकार ने मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है। इस घटना ने वकीलों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ा दिया है और आगे की स्थिति को लेकर चिंता है।
वकीलों के समर्थन में उत्तर प्रदेश बार काउंसिल ने भी बयान जारी किया है और मामले की न्यायिक जांच की मांग की है। इस मामले में वकीलों के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने की मांग की जा रही है।
इस घटना के बाद से गाजियाबाद की अदालतों में काम ठप है और वकीलों ने अपने काम काज को बहिष्कार करने का फैसला किया है।