नेशनल डेस्क। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की भारत के प्रति आक्रामक नीति को उनकी घटती लोकप्रियता दर और देश में बढ़ते असंतोष से जोड़ा जा रहा है। अगले साल होने वाले आम चुनावों से पहले टूट्रूडो खबराए हुए हैं। यही वजह है कि वह और उनकी लेबर पार्टी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सिख समुदाय को साधने की उनकी कोशिशों में लगी है। कनाडा में महंगाई, बहदाल स्वास्थ्य सेवाएं और बढ़ते अपराध दर को लेकर शिकायतें बढ़ रही हैं। एक इप्सोस सर्वे के अनुसार, सिर्फ 26% लोगों ने ट्रूडो को प्रधानमंत्री पद के लिए सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवार माना, जो कंजर्वेटिव नेता पियरे पोइलिवर से 19 प्रतिशत कम है। ऐसे में सर्वे में अनुमान लगाया गया है कि अगर आज चुनाव हो जाए तो कंजर्वेटिव नेता पियरे पोइलिवर कनाडा के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं।
यदि आज चुनाव हुए तो कनाडा के विपक्ष के नेता और कंजर्वेटिव पार्टी के प्रमुख पियरे पोइलिवर देश का नेतृत्व करने के लिए सबसे लोकप्रिय विकल्प हैं। यह बात एक नहीं बल्कि कई सर्वे में सामने आई है। मार्केट रिसर्च एंड पब्लिक ओपिनियन कंपनी इप्सोस द्वारा ग्लोबल न्यूज कनाडा के लिए विशेष रूप से किए गए एक इस जनमत सर्वेक्षण ने ट्रूडो की नींद उड़ा दी है।
एक के बाद एक ट्रूडो की पार्टी को लगा चुनावी झटका
यह तब सामने आया है जब ट्रूडो की पार्टी को हाल ही में दो बड़े चुनावी झटके लगे। पिछले महीने, लिबरल पार्टी ने मॉन्ट्रियल में एक सुरक्षित माने जाने वाले सीट पर हार का सामना किया, जबकि तीन महीने पहले टोरंटो में भी ऐसा ही हुआ। इससे पहले, जगमीत सिंह की न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी ने लिबरल सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। जगमीत सिंह खालिस्तान के समर्थक रहे हैं। इस बीच, ट्रूडो की पार्टी के भीतर से उन्हें पद छोड़ने की मांग भी तेज हो रही है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि लिबरल पार्टी का हाल भी ब्रिटेन के कंजर्वेटिव्स जैसा हो सकता है। हालांकि, ट्रूडो दो बार संसद में अविश्वास प्रस्तावों को पार कर चुके हैं, लेकिन उनकी स्थिति कमजोर मानी जा रही है। कनाडा में करीब 7.7 लाख सिख हैं, जो चौथी सबसे बड़ी जातीय समूह है, और उनमें से एक हिस्सा खालिस्तान की मांग का समर्थन करता है।