बहराइच। सांप्रदायिक हिंसा के दौरान पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। लेकिन दो महिला अधिकारियों की कार्यशैली पर तारीफें मिल रही हैं। डीएम मोनिका रानी और एसपी वृंदा शुक्ला ने बहादुरी दिखाई और हिंसा की चपेट में आए इलाकों में जाकर हालात पर नियंत्रण करने की कवायद की।
एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश ने एसपी को फटकार लगाई, जिसके बाद अधिकारी हरकत में आए और संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल को तैनात किया गया। इससे आगजनी की घटनाओं पर काबू पाया गया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। लापरवाही बरतने वाले स्थानीय पुलिस अधिकारियों पर जल्द कार्रवाई की जा सकती है। एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश मंगलवार को भी बहराइच में कैंप करेंगे, जिसके बाद वापस आकर डीजीपी को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे।
बहराइच के महसी इलाके में प्रतिमा विसर्जन के लिए जा रहे रामगोपाल मिश्रा की गोली लगने से मौत बताने के बाद सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। इससे आक्रोशित लोगों ने कई हिस्सों को निशाना बनाना शुरू कर दिया। इसकी चपेट में बहराइच-लखनऊ हाईवे के कई गांव भी आ गए।
सरकार ने एक दर्जन अधिकारियों और अतिरिक्त पुलिस बल बहराइच भेजा है। एडीजी कानून-व्यवस्था, गृह सचिव के अलावा चार एसपी रैंक के अधिकारी देवेश पांडेय, अजय कुमार, त्रिभुवन सिंह व अरुण कुमार सिंह को बहराइच भेजा गया। इसके अलावा दो एएसपी, चार सीओ, छह कंपनी पीएसी और एक कंपनी आरएएफ को भी बहराइच भेजा गया।
जोन और रेंज से भी कई एएसपी, सीओ, निरीक्षक, उपनिरीक्षक समेत सैकड़ों पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया गया। मुख्यमंत्री ने डीजीपी प्रशांत कुमार और अपर मुख्य सचिव गृह दीपक कुमार से रिपोर्ट लेने के बाद एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश और गृह सचिव डॉ. संजीव गुप्ता को हालात पर काबू पाने बहराइच भेजा।
दंगाइयों पर सरकार सख्त, पल-पल की जानकारी लेते रहे योगी
