रायबरेली। जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक जीवित महिला का 34 साल पहले का मृत्यु प्रमाणपत्र बनाया गया। देवकली नामक महिला ने आरोप लगाया है कि उसका मृत्यु प्रमाणपत्र 15 अक्तूबर 1990 को बनाया गया था, जबकि वह जीवित है और अपने परिवार के साथ रहती है।
इस मामले की जांच डीपीआरओ को सौंपी गई है और रिपोर्ट के आधार पर गड़बड़ी बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। यह मामला सलोन ब्लॉक के गांवों में जन्म प्रमाणपत्र स्कैंडल के बाद सामने आया है, जहां दो फर्जी जन्म प्रमाणपत्र भी पकड़े गए हैं।
देवकली ने बताया कि उन्हें जब इस बात की जानकारी मिली कि उनका मृत्यु प्रमाणपत्र बन गया है, तो वह हैरान रह गईं। उन्होंने तुरंत इसकी शिकायत जिलाधिकारी से की और मामले की जांच की मांग की।
मामले की जांच में पता चला है कि देवकली का मृत्यु प्रमाणपत्र ग्राम पंचायत बहुतई से जारी किया गया था। इस प्रमाणपत्र में देवकली की मौत की तिथि 15 अक्तूबर 1990 दर्शाई गई है, जबकि वह जीवित हैं।
इस मामले में जिलाधिकारी अर्पित उपाध्याय ने कहा कि यह बहुत गंभीर मामला है और इसकी जांच की जाएगी। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला रायबरेली जिले में फर्जीवाड़े की एक बड़ी घटना है, जिसमें जिला प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठाया गया है। लोगों में आक्रोश है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है।